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बिहार टेंडर घोटाला: रिशु श्री से SVU की 15 घंटे पूछताछ, बड़े अफसरों तक पहुंची जांच

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बिहार टेंडर घोटाले में SVU ने रिशु श्री से 15 घंटे पूछताछ की। जांच अब बड़े अफसरों और कथित सिंडिकेट तक पहुंचती दिख रही है।

पटना/आलम की खबर:बिहार के चर्चित टेंडर घोटाले की जांच अब एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने कथित मुख्य आरोपी रिशु श्री से करीब 15 घंटे तक लंबी और मैराथन पूछताछ की है। इस पूछताछ में जांच एजेंसी का फोकस टेंडर प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों, कमीशन के खेल और एक बड़े नेटवर्क यानी सिंडिकेट की भूमिका को समझने पर रहा। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान कई बार ऐसे सवाल भी पूछे गए जिनका जवाब देने से आरोपी बचते नजर आए, खासकर जब बात बड़े अफसरों और प्रभावशाली नामों की आई।

SVU की तीन अलग-अलग टीमों ने अलग-अलग चरणों में रिशु श्री से पूछताछ की। शुरुआती दौर में उन्होंने ज्यादातर सवालों पर चुप्पी साधे रखी, जबकि बाद में कुछ सवालों के जवाब बेहद सीमित और टालमटोल भरे अंदाज में दिए गए। जांच अधिकारियों के अनुसार, यह पूछताछ पूरी तरह रिकॉर्ड की गई है ताकि भविष्य में कानूनी प्रक्रिया के दौरान इसका उपयोग किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि जांच का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।सूत्रों के अनुसार, SVU ने पूछताछ के दौरान विशेष रूप से जल संसाधन विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, बुडको, भवन निर्माण विभाग और BMSICL से जुड़े टेंडरों पर सवाल किए। आरोप है कि इन विभागों में टेंडर प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर कमीशन के आधार पर सेटिंग की जाती थी और कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया जाता था। जांच टीम ने यह जानने की कोशिश की कि जेम्स पोर्टल जैसे राष्ट्रीय स्तर के सिस्टम में भी कैसे कथित तौर पर प्रभाव डालकर मनचाही कंपनियों को टेंडर दिलाए जाते थे।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रिशु श्री से सिंडिकेट से जुड़े कई नामों पर बार-बार सवाल किए गए, जिनमें तारणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश सिंह जैसे नाम शामिल बताए जाते हैं। हालांकि इन सवालों पर आरोपी ने कभी रिश्तों की बात कही तो कभी परिचय तक सीमित जवाब दिया, लेकिन पैसों के लेनदेन और भूमिका को लेकर कई सवालों पर वे चुप्पी साधते रहे। जांच एजेंसी का मानना है कि यह चुप्पी जांच के लिए महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है।

इसके अलावा अभिलाषा शर्मा, योगेन्द्र सागर और आनंद किशोर जैसे नामों को लेकर भी पूछताछ की गई। इनसे जुड़े सवालों पर भी कई बार स्पष्ट जवाब नहीं मिले और जांच टीम को बार-बार सवाल दोहराने पड़े। SVU का कहना है कि पूरी पूछताछ को गंभीरता से रिकॉर्ड किया जा रहा है ताकि हर बयान का विश्लेषण किया जा सके और आगे की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, आने वाले तीन दिन इस केस के लिए बेहद अहम हैं क्योंकि रिमांड अवधि समाप्त होने से पहले SVU पूरी कोशिश कर रही है कि सिंडिकेट की पूरी संरचना और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सके। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ेगी, कई और अहम तथ्य सामने आ सकते हैं जो इस पूरे टेंडर घोटाले की परतें खोल सकते हैं।फिलहाल जांच का पूरा फोकस टेंडर प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं, कमीशन आधारित सिस्टम और अफसरों की संभावित भूमिका पर है। SVU का कहना है कि जब तक सभी कड़ियां साफ नहीं हो जातीं, जांच जारी रहेगी। वहीं इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

टेंडर घोटाले जैसे मामले केवल आर्थिक अपराध नहीं होते, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जब सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में टेंडर प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर जनता के हितों पर पड़ता है।

SVU की जांच इस बात की ओर संकेत करती है कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क होने की आशंका है। ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण होता है तथ्यों की निष्पक्ष जांच और समय पर कार्रवाई।

अगर जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह न केवल इस केस को सुलझाने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक सख्त संदेश भी देगा कि सरकारी प्रक्रियाओं में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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